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janmashtami shubh muhurt, puja vidhi 2020

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* इस बार जन्माष्टमी रोहिणी रहित सर्वार्थसिद्धि योग में होगी * जन्माष्टमी का त्योहार भादप्रद महीने की अष्टमी तिथि के दिन मनाया जाता है, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। भगवान श्री कृष्ण का जन्म का भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को हुआ था। कृष्ण जी ने रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया था। इसीलिए अगर अष्टमी तिथि के दिन रोहिणी नक्षत्र होता है, तो यह एक बहुत ही शुभ और विशेष संयोग माना जाता है। इस बार जन्माष्टमी का स्मार्त व्रत 11 को व मुख्य व्रत  12 अगस्त बुधवार के दिन रखा  जाएगा। इस बार जन्माष्टमी के दिन अष्टमी की तिथि और कृतिका नक्षत्र है।  अष्टमी तिथि आरंभ – 09:06 (11 अगस्त) अष्टमी तिथि समाप्त – 11:15 (12 अगस्त अगर दोनों दिन अष्टमी आधी रात को व्याप्त न करे तो प्रत्येक स्थिति में जन्माष्टमी व्रत दूसरे ही दिन होगा भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ जन्माष्टमी का महत्व 1.  इस दिन देश के समस्त मंदिरों का श्रृंगार किया जाता है। 2.  श्री कृष्णावतार के उपलक्ष्य में झाकियाँ सजाई जाती हैं। 3.  भगवान श्री...

AshadNavratri_22june2020 आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 22 जून से प्रारम्भ, इस बार 8 दिनों की होगी नवरात्रि 29 जून तक*

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*आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 22 जून से प्रारम्भ, इस बार 8 दिनों की होगी नवरात्रि 29 जून तक* आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 22 जून सोमवार आद्रा नक्षत्र और वृद्धि योग में प्रारम्भ होगी। इस बार पंचमी व षष्टी तिथि एक ही दिन होने के कारण आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 8 दिन की होगी। कलश स्थापना 22 जून को होगी।29 जून को नवमी तिथि होगी। घटस्थापना मुहूर्त सुबह 5 : 24 बजे से 7:12 बजे तक 1 घंटे 48 मिनट घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि सनातन धर्म में कोई भी धार्मिक कार्य आरंभ करने से पूर्व कलश स्थापना करने का विधान है। पृथ्वी को कलश का रूप माना जाता है तत्पश्चात कलश में उल्लिखित देवी- देवताओं का आवाहन कर उन्हें विराजित किया जाता है। इससे कलश में सभी ग्रहों, नक्षत्रों एवं तीर्थों का निवास हो जाता है।  देवी भागवत के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक माँ काली, तारा देवी, त्...

mahashivratri 21 Feb. 2020 ko

*महाशिवरात्रि 21 फरवरी को मनाई जाएगी* *पंच महापुरुषों में शश योग बनने व सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत योग होने से साधना की सिद्धि के लिए विशेष* फाल्गुन  महीने की शिवरात्रि को  महाशिवरात्रि कहा जाता है। इसे फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। चतुर्दशी तिथि का आरंभ 21 फरवरी शुक्रवार को शाम 5:20 बजे से होगा। चतुर्दशी तिथि 22 फरवरी शाम 7:02 बजे तक रहेगी। इस बार एक विशेष  पंच महापुरुषों में शश योग बन रहा है जो साधना की सिद्धि के लिए विशेष रहेगा। इस बार महाशिवरात्रि पर चंद्र शनि की मकर में युति के साथ पंच महापुरुषों में शश योग बनेगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि चंद्रमा मन तथा शनि ऊर्जा का कारक ग्रह है। यह योग साधना की सिद्धि के लिए विशेष महत्व रखता है। चंद्रमा को कला तथा शनि को काल पुरुष का पद प्राप्त है। ऐसी स्थिति में कला तथा काल पुरुष के युति संबंध वाली यह रात्रि सिद्ध रात्रि की श्रेणी में आती है।  साथ ही महाशिवरात्रि  पर सर्वार्थसिद्धि योग एवं अमृत योग का संयोग बन रहा  है। इस योग में शिव पार्वती का पूजन श्रेष्ठ माना गया है।  पौर...

purnima vrat 8 fabruary and snan daan 9 feb.

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*पूर्णिमा व्रत 8 फरवरी को एवं माघी पूर्णिमा स्नान 9 फरवरी को होगा* माघ मास के शुक्ल पक्ष की माघी पूर्णिमा व्रत 8 फरवरी को व स्नान दान पूर्णिमा 9 फरवरी को होगा। पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 8 फरवरी शाम 4:01 बजे से  9 फरवरी दोपहर 1:02 बजे तक रहेगा। । इस दिन अश्लेषा नक्षत्र और सौभाग्य योग से स्नान-दान शुभकारक होगा।  इसी दिन माघ मास स्नान पर्व पर संगम में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे। इसी के साथ माघी पूर्णिमा से ही संगम की रेती पर पौष पूर्णिमा से शुरू हुआ एक माह का कल्पवास भी समाप्त होगा। इस पूर्णिमा पर किसी पवित्र नदीं में स्नान करने से मनुष्य के सभी प्रकार के पाप तो धूल ही जाते हैं। इसके साथ ही उसकी समस्त इच्छाओं की पूर्ति भी होती है।  ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि माघ पूर्णिमा स्नान के दिन 9 फरवरी को  सूर्योदय से पूर्व तारों की छांव में स्नान करने से मनुष्य के घोर पाप भी धूल जाते हैं। इसलिए माघ पूर्णिमा को अत्यंत ही विशेष माना जाता है। इसके अलावा इस दिन स्नान करने से व्यक्ति को मरणोपरांत मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इसके साथ ही माघ पूर्णिमा को पित...

Gupt Navratri

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गुप्त नवरात्रि 25 जनवरी से प्रारंभ होगी गुप्त नवरात्रि 25 दिसम्बर, शनिवार  से प्रारंभ होगी और 3 फरवरी सोमवार नवमी तिथि को समाप्त होगी तथा नवरात्रि पारण 4 फरवरी को होगा। घटस्थापना मुहूर्त 25 जनवरी शनिवार प्रतिपदा तिथि को सुबह 9:53 बजे से 10:49 बजे तक व अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:17 बजे से 1:01 बजे तक रहेगा। गुप्त नवरात्रि हिंदुओं के महत्वपूर्ण धार्मिक त्यौहार में से एक है। यह हिन्दू सभ्यता के अनुसार बहुत शुभ माना जाता है। लोगों को पौराणकि समय से इसमें आस्था और विश्वास है। मुख्य रूप से, यह देवी माँ शक्ति को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है ताकि जीवन में कोई तनाव न हो। यहां तक कि यदि आपकी कुछ समस्याएं हैं, तो आप किसी विशेष समस्या के लिए विशेष मंत्रों का जप करके उन समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। देवी भागवत के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि आते हैं। जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक माँ काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता...

Basant Panchmi

बसन्त पंचमी पर्व 30 जनवरी को मनाया जाएगा बसन्त पंचमी का पर्व माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. इस वर्ष यह पर्व 30 जनवरी को मनाया जायेगा। बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्तों में शामिल किया जाता है. बसंत पंचमी के दिन शुभ कार्य जिसमें विवाह, भवन निर्माण, कूप निर्माण, फैक्ट्री आदि का शुभारम्भ, शिक्षा संस्थाओं का उद्धघाटन करने के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में प्रयोग किया जाता बसन्त पंचमी के दिन भगवान ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि श्रीविष्णु, श्री कृष्ण-राधा व शिक्षा की देवी माता सरस्वती की पूजा पीले फूल, गुलाल, अर्ध्य, धूप, दीप, आदि द्वारा की जा जाती है. पूजा में पीले व मीठे चावल व पीले हलुवे का श्रद्धा से भोग लगाकर, स्वयं इनका सेवन करने की परम्परा है। माता सरस्वती बुद्धि व संगीत की देवी है। पंचमी के दिन को माता सरस्वती के जन्मोत्सव के रुप में भी मनाया जाता है। यह पर्व ऋतुओं के राजा का पर्व भी है। एक किंवदन्ती के अनुसार इस दिन ब्रह्मा जी ने सृ्ष्टि की रचना की थी। यह त्यौहार उतर भारत में पूर्ण हर्ष- उल्लास से मनाया जाता है. एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन भगवान...

Dhanteras par kya kare, धनतेरस पर चल अचल संपत्ति खरीदने पर तेरह गुना वृद्धि होती है

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धनतेरस पर चल अचल संपत्ति खरीदने पर तेरह गुना वृद्धि होती है धनतेरस 5 दिवसीय दिवाली त्यौहार के शुरूआत का प्रतीक है। यह हिंदू महीने कार्तिक में तेरहवें दिन मनाई जाती है। 25 अक्टूबर शुक्रवार त्रियोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। त्रियोदशी तिथि कार्तिक माह के कृष्णपक्ष शुक्रवार 25 अकटुबर को शाम 07 : 08 बजे से प्रारंभ होकर 26 अक्टूबर शाम 03:46 बजे तक रहेगी।  25 अक्टूबर की सुबह द्वादशी तिथि और शाम को धनतेरस रहेगी। पंचांग भेद से 26 को रूप चौदस रहेगी।27 अक्टूबर को भी सुबह रूप चौदस रहेगी और प्रदोष कालीनअमावस्या रात में होने से दीपावली 27 को ही मनेगी धनतेरस शुभ मुहूर्त धनतेरस खरीददारी व पूजन मुर्हुत - 19:08 बजे से 20:13 बजे तक प्रदोष काल - 17:38 से 20:13 बजे तक वृषभ काल - 18:50 से 20:45 बजे तक रहेगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार सागर मंथन के समय महर्षि धन्वंतरि अमृत कलश लेकर अवतरित हुए थे। इसीलिए इस दिन बर्तन खरीदने की प्रथा प्रचलित हुई। यह भी माना जाता है कि धनतेरस के शुभावसर पर चल या अचल संपत्ति खरीदने से धन में तेरह गुणा वृद्धि होती है बर्तन खरीदने की परंपरा को पूर्ण अ...

shardiye Navmi Puja, महा नवमी के दिन करे कन्याओं जी पूजा

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महा नवमी के दिन करे कन्याओं जी पूजा शारदीय नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ रूपों के पूजन के बाद नवमी तिथि के दिन मां दुर्गा को विदाई दी जाती है। इस दिन को महानवमी के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है. इस साल नवरात्रि में महानवमी 7 अक्टूबर की पड़ रही है. 6 अक्टूबर सुबह 10 बजकर 56 मिनट से नवमी तिथि शुरू होकर 7 अक्टूबर सुबह 12 बजकर 40 मिनट पर समाप्त होगी। देश के कई हिस्सों में लोग अष्टमी की पूजा करते हैं यानी मां दुर्गा को अष्टमी पर विदाई देते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग आठवां नवरात्रि 6 अक्टूबर  दिन रविवार दोपहर 03:05 से 07 अक्टूबर सुबह 05:46 तक रहेगा। तथा सर्वार्थ सिद्धि तिथि : नवमी, महानवमी नवरात्रि 7 अक्टूबर  दिन सोमवार  शाम 05:26 से 8 अक्टूबर सुबह 05:46 तक रहेगी।  ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की महानवमी के दिन छोटी बच्चियों को मां का रूप मानते हुए उनकी पूजा की जाती है. साथ ही उनका आशिर्वाद लिया जाता है. यह दिन काफी शुभ माना गया है. इस दिन पूजा-पाठ करने से भक्तों से सिर पर मां दुर्गा की कृपा बरसती है और सभी परेशानियां दूर होती है।  इस दिन घर में छ...

सर्वपितृ मोक्ष अमावस पर बनेगा पंचग्रही योग, panch grahi yog on amavas

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सर्वपितृ मोक्ष अमावस पर बनेगा पंचग्रही योग इस वर्ष पितृपक्ष की अमावस्या तिथि 28 सितंबर शनिवार पर मोक्ष अमावस्या का योग बन रहा है। इस तिथि पर जल तर्पण से पितृ न सिर्फ तृप्त होंगे अपितु उनके आशीर्वाद से सफलता और समृद्धि के द्वार भी खुलेंगे। यह सुयोग सौ बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाला भी है। 28 सितंबर को शनिवार और सर्वपितृ अमावस्या का सुयोग इसे मोक्ष अमावस्या की श्रेणी प्रदान कर रहा है। उसी दिन धृति योग भी बन रहा है। धृति योग के स्वामी जल देवता हैं इसलिए उस दिन पितरों का जल से तर्पण विशेष महत्व और प्रभाव वाला होगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की इस सर्वपितृ अमावस पर पंचग्रही योग बन रहा है। 28 सितंबर को कन्या राशि मे सूर्य, चंद्र, मंगल,बुध व शुक्र ग्रह एक साथ होंगे।  अमूमन बनने वाले पंचग्रही योग शुभ होते ज्योतिषियों का मत है कि पंचग्रही योग यदि शुभ ग्रहों से बने तो यह काफी लाभदायक साबित होता है।  जिस भी जातक के कुंडली में यह संयोग बनता है। वह जीवन में कई सफलताओं को हासिल करने में सफल होता है। उसे मान सम्मान के साथ ही धन लाभ भी होता है। करियर में भी बढ़ोतरी होती है...

shardiya Navratri, शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर से 9 दिनों की रहेगी

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शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर से 9 दिनों की रहेगी शारदीय नवरात्र में इस वर्ष देवी दुर्गा का आगमन हाथी पर और वापसी घोड़े पर होगी। देवी का आगमन आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर 29 सितंबर को होगा और विदाई दशमी तिथि पर आठ अकटुबर को होगी।  इस वर्ष नवरात्र पूरे नौ दिन का होगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की  पहले दिन यानी 29 सितंबर को विधि विधान से घट स्थापना होगी। उसके बाद से नवरात्रि के व्रत प्रारंभ होंगे। इन 9 दिनों में माता के 9 स्वरुपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस बार दशहरा  08 अक्टूबर को है। 29 सितंबर- प्रतिपदा - पहला दिन, घट या कलश स्थापना। इस दिन माता दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा होगी। 30 सितंबर- द्वितीया - दूसरा दिन। इस दिन माता के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। 1 अक्टूबर- तृतीया - तीसरा दिन। इस दिन दुर्गा जी के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाएगी। 2 अक्टूबर- चतुर्थी - चौथा दिन। माता दुर्गा के कुष्मांडा स्वरुप की पूजा-अर्चना होगी। 3 अक्टूबर- पंचमी - पांचवां दिन- इस दिन मां भगवती के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा की जाती है। 4 अक्टूबर- षष्ठी- छठा दि...

Sarv pitra amavas 20 वर्षो बाद सर्वपितृ अमावस्या व शनि अमावस्या का महासयोंग

20 वर्षो  बाद सर्वपितृ अमावस्या व शनि अमावस्या का महासयोंग इस साल पितृपक्ष अमावस्या 28 सितंबर शनिवार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष के दिन है। खास बात यह है कि दो दशक के बाद सर्व मोक्ष अमावस्या 28 सितंबर शनिवार को है। इस दिन का श्राद्धकर्म अनंत फलदायक होता है।  इसकी सबसे बड़ी वजह है पितृ पक्ष में इस अमावस्या का होना। सर्वपितृ अमावस्या के दिन ही शनि अमावस्या का महासंयोग बन रहा है जो कि बहुत ही सौभाग्यशाली है। इसी के साथ 28 सितंबर को गोचर में पंचग्रही योग बन रहा है। इस दिन कन्या राशि मे चंद्र ग्रह, मंगल, बुध, शुक्र व सूर्य ग्रह उपस्थित रहेंगे जो फलदायी होंगें। हालांकि विद्वान ब्राह्मणों द्वारा कहा जाता है कि जिस तिथि को दिवंगत आत्मा संसार से गमन करके गई थी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की उसी तिथि को पितृ शांति के लिये श्राद्ध कर्म किया जाता है। लेकिन समय के साथ कभी-कभी जाने-अंजाने हम उन तिथियों को भूल जाते हैं जिन तिथियों को हमारे प्रियजन हमें छोड़ कर चले जाते हैं।  इसलिये अपने पितरों का अलग-अलग श्राद्ध करने की बजाय सभी पितरों के लिये एक ही दिन श्राद्ध करने का विधान बताया गया। ...

जन्म अष्टमी 23 अगस्त को ही मनाई जाएगी। janm ashtmi

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जन्म अष्टमी 23 अगस्त को ही मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 23 अगस्त को सुबह 8.09 बजे से 24 अगस्त को सुबह 8.32 बजे तक है। जबकि रोहिणी नक्षत्र जिसमें भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था वह 24 अगस्त को सुबह 3.48 बजे से शुरू होगा और ये 25 अगस्त को सुबह 4.17 बजे उतरेगा। जबकि कुछ ज्योतिषियों का ये भी मानना है कि रोहिणी नक्षत्र 23 अगस्त को रात 11.56 बजे से लग जाएगा। इसलिए जन्म अष्टमी 23 अगस्त को ही मनाई जाएगी।  भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। अष्टमी को ही यह पर्व मनाया जाता है, यदि रोहिणी का संयोग मिल जाय तो और शुभ है।  मंथन यही किया जा रहा है कि ऐसा वक्त जब रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि दोनों एक साथ पड़े तो उत्तम 23 अगस्त की तारीख है। ऐसे में 23 अगस्त ही जन्माष्टमी मनाने के लिए शुभ होना चाहिए। जन्‍माष्‍टमी का व्रत कैसे रखें? जो भक्‍त जन्‍माष्‍टमी का व्रत रखना चाहते हैं उन्‍हें एक दिन पहले केवल एक समय का भोजन करना चाहिए. जन्‍माष्‍टमी के दिन सुबह स्‍नान करने के बाद भक्‍त व्रत का संकल्‍प लेते हुए अगले दिन रोहिण...

गोगा नवमी 25 अगस्त की माने जाएगी, Goga navmi

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गोगा नवमी 25 अगस्त की माने जाएगी  भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की नवमी को रविवार के दिन 25 अगस्त को गोगा नवमी मनाई जाएगी। गोगा नवमी के दिन नागों की पूजा करते हैं मान्यता है कि गोगा देवता की पूजा करने से सांपों से रक्षा होती है. गोगा देवता को सांपों का देवता भी माना जाता है. गोगा देवता की पूजा श्रावण मास की पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन से आरंभ हो जाती है, यह पूजा-पाठ नौ दिनों तक यानी नवमी तक चलती है इसलिए इसे गुग्गा नवमी भी कहा जाता है. गोगा देव महाराज से संबंधित एक किंवदंती के अनुसार गोगा देव का जन्म नाथ संप्रदाय के योगी गोरक्षनाथ के आशीर्वाद से हुआ था। योगी गोरक्षनाथ ने ही इनकी माता बाछल को प्रसाद रूप में अभिमंत्रित गुग्गल दिया था जिसके प्रभाव से महारानी बाछल से गोगा देव (जाहरवीर) का जन्म हुआ। यह पर्व बहुत ही श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर बाबा जाहरवीर (गोगाजी) के भक्त अपने घरों में ईष्टदेव की वेदी बनाकर अखंड ज्योति जागरण कराते हैं तथा गोगा देवजी की शौर्य गाथा एवं जन्म कथा सुनते हैं। इस प्रथा को जाहरवीर का जोत कथा जागरण कहा जाता है। कई स्थानों पर इस दिन मेले लग...

19 वर्ष पश्चात रक्षा बंधन व स्वतंत्रता दिवस एक ही दिन मनाया जाएगा Raksha Bandhan

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19 वर्ष पश्चात रक्षा बंधन व स्वतंत्रता दिवस एक ही दिन मनाया जाएगा रक्षाबंधन पर्व 15 अगस्त सावन माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा तिथि गुरुवार श्रवण नक्षत्र को मनाया जाएगा।इसी के साथ श्रावण माह समाप्त होकर 16 अगस्त से भाद्रपद माह कृष्णपक्ष का प्रारंभ होगा।पूर्णिमा तिथि 14 अगस्त शाम 3: 45 से प्रारंभ होकर 15 अगस्त शाम 5: 58 तक रहेगी।  इस बार 19 साल बाद रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस एक साथ मनाया जाएगा ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की स्वतंत्रता दिवस के साथ भाई-बहन के प्यार का पर्व मनाया जाएगा।  इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं है। इसलिए पूरा दिन राखी बांधने के लिए शुभ रहेगा। कई ऐसे संयोग बनेंगे, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ जाएगा।  चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र का संयोग बहुत ख़ास रहेगा। जिसके चलते पर्व की महत्ता और अधिक बढ़ेगी। रक्षा बंधन के 4 दिन पहले ही गुरु मार्गी होकर सीधी चाल चलने लगे है। श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग, बव करण के साथ सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा मकर राशि में होंगे। ये सभी शुभ संयोग मिलकर इस बार रक्षाबंधन को खास बना रहे हैं।  रक्षाबंधन पर लगभग ...

Nag panchmi Puja 25 साल बाद नाग पंचमी पर बनेगा संजीवनी महायोग

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25 साल बाद नाग पंचमी पर बनेगा संजीवनी महायोग 5अगस्त सोमवार श्रवण मास, शुक्लपक्ष की पंचमी पूर्णा तिथि, सोम का हस्त नक्षत्र और सिद्धि योग व श्रवण मास के तीसरे सोमवार को नाग पंचमी संजीवनी महायोग में मनाई जाएगी । यह योग इस वर्ष 25 वर्षो पश्चात बन रहा है। यह योग 16 अगस्त 1993 में बना था। अगला योग 21 अगस्त 2023 में बनेगा। पंचमी तिथि 4 अगस्त शाम 6:48 बजे से प्रारंभ होकर 5 अगस्त दोपहर 2:52 बजे तक रहेगी। नाग पूजन का समय 5 अगस्त को सुबह 6 बजे से 7:37 बजे तक एवं 9:15 से 10:53 बजे तक रहेगा। नागपंचमी एक ऐसा पर्व है जहाँ नाग शिव के गले का हार है। वही भगवान विष्णु की शैय्या है। इन्ही कारणों से नाग की देवता के रूप में पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की  यह समय वर्षा ऋतु का भी होता है जिससे माना जाता है कि भूगर्भ से नाग निकल कर भूतल पर आ जाते है। अतः वह किसी को नुकसान न पहुचाये इसलिए नागों की पूजा की जाती है। नागपंचमी पर पूजन कैसे करे नागपंचमी पर नाग मंदिर में या नाग देवता की प्रतिमा की पूजा की जाती है या तांबे की धातु से बने नाग की पूजा की जाती है जीवित नाग की पूजा...

Hariyali amawas 125 वर्षो बाद हरियाली अमावस पर बनेगा पंच महायोग

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125 वर्षो बाद हरियाली अमावस पर बनेगा पंच महायोग 1 अगस्त गुरुवार हरियाली अमावस पर पंच महायोग जिसमे सिद्धि योग, शुभ योग, गुरु पुष्यामृत योग, सर्वार्थसिद्धि योग, अमृतसिद्धि योग का सयोंग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि इस दिन कर्क राशि मे शुक्र, चंद्र, सूर्य पुष्य नक्षत्र में तथा मंगल अश्लेषा नक्षत्र में विचरण कर चतुर्थ ग्राही योग बना रहे है । यह संयोग 125 वर्ष पूर्व सन 1894 में 1अगस्त बुधवार को सूर्य चंद्र पुष्य नक्षत्र में व बुध पुनर्वसु नक्षत्र कर्क राशि मे योग बना था। पांच महायोग के संयोग में शिव व शक्ति की पूजा का महत्व होता है। इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए बिल्व पत्र, केसर युक्त चंदन, पांच मेवा, धतूरे के फूल, पंचामृत आदि से अभिषेक करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। तथा सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है।       जिनकी कुंडली मे कालसर्प दोष, शनि की दशा व पित्र दोष हो उन्हें हरियाली अमावस के दिन शिवलिंग पर पंचामृत अवश्य चढ़ाना चाहिए। हरियाली अमावस्या प्रकृति का पर्व हरियाली अमावस्या प्रकृति का पर्व होने के कारण इस दिन पौधरोपण करने स...

sawan maas start on 17 july 2019 सावन मास का आरंभ 17 जुलाई से 15 अगस्त तक

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श्रवण मास का आरंभ 17 जुलाई से 15 अगस्त तक 17 जुलाई बुधवार सावन माह का पहला दिन और 15 अगस्त रक्षाबंधन तक रहेगा। 17 जुलाई की ही सूर्य चंद्र की राशि कर्क में प्रवेश करेगा। इस माह चार सोमवार पड़ेंगे जो की 22 जुलाई, 29 जुलाई, 5 अगस्त, 12 अगस्त को होंगे। 5 अगस्त को नागपंचमी का त्योहार भी मनाया जाएगा। सावन माह में शिव की पूजा-आराधना का विशेष विधान है। सावन के सोमवार को शिव की पूजा व व्रत रखा जाता है। सावन मास भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। शिव पुराण के अनुसार जो कोई व्यक्ति सावन मास में सोमवार के व्रत रखता है उसकी समस्त मनोकामनाये पूरी होती है। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की कुछ लोग सावन के पहले सोमवार से 16 सोमवार व्रत रखने का संकल्प लेते है। ऐसी मान्यता है कि जिन कन्याओ का विवाह नही हो रहा हो यदि वह सावन मास के पहले सोमवार से 16 सोमवार का व्रत करती है तो उनका विवाह शीघ्र हो जाता है। विवाहित महिलाओं के व्रत रखने से भगवान भोलेनाथ उन्हे सौभाग्य का वरदान देते है। काँवरिया यात्रा सावन मास में शिव भक्तों द्वारा कांवर यात्रा का आयोजन किया जाता है।काँवरिया तीर्थ स्थलों से पै...

Guru purnima 16 july 2019 ko, 16 जुलाई को शाम 4:30 बजे तक होगी गुरुपूर्णिमा पूजा

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16 जुलाई को शाम 4:30 बजे तक होगी गुरुपूर्णिमा पूजा 16 जुलाई मंगलवार आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। गुरुपूर्णिमा तिथि 16 जुलाई सुबह 1 बजकर 48 मिनट से 17 जुलाई सुबह 3:07 बजे तक रहेगी। गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा की जाती है। यह पर्व भारत मे बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हिन्दू धर्म मे गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना जाता है। क्योकि गुरु ही है जो इस संसार रूपी भव सागर को पार करने में सहायता करते है। गुरु के ज्ञान और गुरु के द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति मोक्ष प्राप्त करता है। इसी दिन चंद्र ग्रहण होने के कारण चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पूर्व यानी 16 जुलाई शाम 4:30 बजे से सूतक लग जायेगा। जिसके कारण गुरु पूजा शाम 4:30 बजे से पूर्व तक ही होगी। इस दिन ऋषि वेद व्यास का जन्म हुआ था इसलिए गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को ही मनाई जाती है। क्योंकि वर्षा ऋतु का आरंभ होने के कारण ये चार माह मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते है। इन दिनों न अधिक गर्मी न अधिक सर्दी होती है। इसलिए गुरुज्ञान अध्ययन के लिए यह माह उपयुक्त माने गए है। इस दिन अपने ...

chandra grahan avam guru purnima ek saath गुरुपूर्णिमा व चंद्रग्रहण साथ साथ

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गुरुपूर्णिमा व चंद्रग्रहण साथ साथ 16 जुलाई मंगलवार गुरुपूर्णिमा के साथ चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह उत्तराषाढ़ नक्षत्र धनु राशि मे होगा। गुरूपर्णिमा पर लगातार यह दूसरा साल है जिस दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। इससे पहले 27 जुलाई 2018 को गुरुपूर्णिमा पर ही खग्रास चंद्रग्रहण लगा था। चंद्रग्रहण 16 जुलाई देर रात 1:31 से सुबह 4:31 बजे तक रहेगा। यह चंद्र ग्रहण भारत मे आंशिक रूप से दिखाई देगा तथा साथ ही ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, एशिया, यूरोप एवं दक्षिण अमेरिका में भी दिखाई देगा। गुरुपूर्णिमा पर विशेष पूजा पाठ ध्यान किया जाता है । लोग इस दिन गुरुओं की पूजा करते है। गुरु पूजा के कार्यक्रम सूतक लगने से पहले तक ही होंगे। 16 जुलाई को सूतक  दोपहर 1:30 बजे से ही लग जायेगा। जिस कारण पूजा पाठ इस समय से पूर्व हो करना होगा। ग्रहण के समय ग्रहों की स्थिति शनि व केतु ग्रह चंद्र ग्रह के साथ ही ग्रहण के समय धनु राशि में रहेंगे। जिससे ग्रहण का प्रभाव ज्यादा पड़ेगा। सूर्य के साथ राहु और शुक्र मिथुन राशि मे रहेंगे। इस दौरान मंगल ग्रह नीच का रहेगा। जिससे जातको पर यह योग तनाव बड़ा सकता है। सूर्य और चंद्र ...

देवशयनी एकादशी 12 जुलाई से मांगलिक कार्यो पर लगेगा विराम Dev shayani Ekadashi

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देवशयनी एकादशी 12 जुलाई से मांगलिक कार्यो पर लगेगा विराम देवशयनी एकादशी 12 जुलाई शुक्रवार आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की एकादशी के दिन सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग में मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 11 जुलाई शाम 3:32 बजे से प्रारंभ होकर 12 जुलाई शाम 3: 01 बजे तक रहेगी। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ भी माना गया है. देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी और पद्मनाभा के नाम से भी जाना जाता है सभी उपवासों में देवशयनी एकादशी व्रत श्रेष्ठतम कहा गया है  इस व्रत को करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, तथा सभी पापों का नाश होता है. इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना करने का महत्व होता है क्योंकि इसी रात्रि से भगवान का शयन काल आरंभ हो जाता है जिसे चातुर्मास या चौमासा का प्रारंभ भी कहते है। देवशयनी एकादशी के बाद सभी शुभ कार्यो पर जैसे यग्योपवीत संस्कार, विवाह, दीक्षा, यज्ञ, ग्रह प्रवेश सभी पर विराम लग जायेगा। इस समय भगवान विष्णु चार माह के लिए राजा बलि के यहाँ पाताल लोक में विश्राम करते है। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की वास्तव में यह वे दिन होते हैं जब चारों तरफ नकारात...