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21 June se surya dakshinayan honge

*सायन पद्धति से 21 जून को सूर्य दक्षिणायन होगा* सायन पद्धति के अनुसार सूर्य 21 जून को दक्षिणायन हो जायेगे, जो कि साल का सबसे लंबा दिन होगा। 21 जून को सूर्य 5 बजकर 26 मिनट पर उदय होगा और शाम 7 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। ये सबसे बड़ा दिन 13 घंटे 57 मिनट का होगा और रात 10 घंटे 03 मिनट की होगी।       ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक वर्ष में दो बार सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है। इसे ही उत्तरायण व दक्षिणायन कहते है। जब सूर्य मकर राशि से मिथुन राशि तक भ्रमण करता है तब इस समय को उत्तरायण कहते है। और जब सूर्य कर्क राशि से धनु राशि तक भ्रमण करता है तो इसे दक्षिणायन कहते है।      कर्क संक्रांति के दिन सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ने के बाद क्रमशः दक्षिण की और खिसकते हुए मकर संक्रांति के दिन मकर रेखा पर सीधी पड़ती है। सूर्य की सीधी किरणों के पड़ने के खिसकाव में छह माह लग जाते है। यह समय 21 जून से लेकर 22 दिसम्बर तक होता है। जबकि निरयण पद्धति में यह समय 15 जुलाई से 14 जनवरी के बीच होता है।       धार्मिक मान्यताओं ...

21 June sabse lamba din, aur sabse choti raat

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*21 जून को दो बड़ी खगोलीय घटनाएं,  साल का सबसे बड़ा दिन व सूर्य ग्रहण*  पहली घटना सूर्यग्रहण है। इसमें सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा इस तरह आ जाएगा कि सूर्य का आधे से ज्यादा हिस्सा छिप जाएगा और कंगन की तरह दिखाई देगा। इसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है। दूसरी घटना, 21 को ही सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर आ जाएगा। जिससे ये साल का सबसे बड़ा दिन भी होगा।  ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि 21 जून रविवार को परछाई भी आपका साथ छोड़ेगी। दरअसल ऐसा सूर्य की कर्क रेखा में स्थिति होने के चलते होगा। ठीक 12 बजकर 28 मिनट पर आपको अपनी परछाई नहीं दिखाई देगी। परिभ्रमण पथ के दौरान 21 जून को ठीक 12.28 बजे सूर्य कर्क रेखा पर एकदम लंबवत हो जाएगा। इस दिन भारत सहित उत्तरी गोलार्द्घ में स्थित सभी देशों में सबसे बड़ा दिन तथा रात सबसे छोटी होगी।  सूर्योदय प्रातः 5.26 बजे तथा सूर्यास्त सायं 7.23 मिनट पर होगा, जिससे दिन 13 घंटे 57 मिनट तथा रात 10 घंटे 03 मिनट की होगी। इस खगोलीय घटना के अंतर्गत 21 जून के बाद से सूर्य दक्षिण की ओर गति करना प्रारंभ कर देगा, जिसे दक्षिणायन का प्रारंभ कहा ...

AshadNavratri_22june2020 आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 22 जून से प्रारम्भ, इस बार 8 दिनों की होगी नवरात्रि 29 जून तक*

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*आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 22 जून से प्रारम्भ, इस बार 8 दिनों की होगी नवरात्रि 29 जून तक* आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 22 जून सोमवार आद्रा नक्षत्र और वृद्धि योग में प्रारम्भ होगी। इस बार पंचमी व षष्टी तिथि एक ही दिन होने के कारण आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 8 दिन की होगी। कलश स्थापना 22 जून को होगी।29 जून को नवमी तिथि होगी। घटस्थापना मुहूर्त सुबह 5 : 24 बजे से 7:12 बजे तक 1 घंटे 48 मिनट घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि सनातन धर्म में कोई भी धार्मिक कार्य आरंभ करने से पूर्व कलश स्थापना करने का विधान है। पृथ्वी को कलश का रूप माना जाता है तत्पश्चात कलश में उल्लिखित देवी- देवताओं का आवाहन कर उन्हें विराजित किया जाता है। इससे कलश में सभी ग्रहों, नक्षत्रों एवं तीर्थों का निवास हो जाता है।  देवी भागवत के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक माँ काली, तारा देवी, त्...

Vat savitri puja 22 mai ko manai jayegi

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* वट सावित्री व्रत 22 मई को मनाया जाएगा* वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या 22 मई शुक्रवार को मनाया जाएगा। अमावस तिथि 21 मई रात्रि 9:35 बजे से प्रारम्भ होकर 22 मई रात्रि 11:07 बजे तक रहेगी। यह स्त्रियों का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन महिलाये 16 श्रृंगार कर निर्जला व्रत का संकल्प लेती है।और वट वृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है।  इस दिन सत्यवान सावित्री तथा यमराज की पूजा की जाती है। सावित्री ने इस व्रत के प्रभाव से अपने मृतक पति सत्यवान को धर्मराज से छुड़ाया था। वट वृक्ष के नीचे मिट्टी की बनी सावित्री और सत्यवान तथा भैंसे पर सवार यम की मूर्ति स्थापित कर पूजा करनी चाहिए तथा बड़ की जड़ में पानी देना चाहिए। पूजा के लिए जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भिगोया हुआ चना, फूल, सत्यवान-सावित्री की मूर्ति, बांस का पंखा, लाल धागा, मिट्टी का दीपक, धूप और पांच फल जिसमें लीची अवश्य हो आदि होनी चाहिए जल से वट वृक्ष को सींच कर तने को चारों ओर 12 बार कच्चा धागा लपेट कर तीन बार परिक्रमा करनी चाहिए। साथ ही पंखे से वट वृक्ष को हवा करें इसके बाद सत्यवान−साव...

teen grah shani, guru,shukra may me honge vakri

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*न्याय के देवता शनि 11 मई को मार्गी से वक्री होने जा रहा है * *मई माह में तीन ग्रह होंगे वक्री* शनि 11 मई को अपनी मकर राशि मे वक्री हो जायेगे और 142 दिन तक यानी कि 29 सितंबर तक वक्री रहेंगे। शुक्र देव 13 मई को वृषभ राशि मे वक्री होंगे, गुरु देव 14 मई को अपनी नीच राशि मकर में वक्री होंगे। 29 जून को वक्री गुरु धनु राशि मे प्रवेश करेंगे तथा धनु राशि मे ही 12 सितंबर को मार्गी होंगे। 14 मई को ही सूर्य ग्रह अपनी मेष राशि से वृषभ राशि मे प्रवेश करेंगे। इसी के साथ पूर्व स्व अस्त ग्रह बुध 16 मई को बुध ग्रह वृषभ राशि मे उदित हो जायेगे। शनि को कर्मफल दाता माना जाता है.शनि ग्रह के सम्बन्ध मे अनेक भ्रान्तियां है, इसलिए उन्हे मारक, अशुभ और दुख कारक माना जाता है, लेकिन शनि उतना अशुभ और मारक नहीं हैं, जितना उन्हें माना जाता है। जबकि शनि शत्रु नहीं, बल्कि मित्र हैं. वह मोक्ष प्रदान करने वाले एक मात्र ग्रह है। शनि प्रकृति में संतुलन पैदा करते हैं और हर प्राणी के साथ उचित न्याय करते हैं. जो लोग अनुचित विषमता और अस्वाभाविक समता को आश्रय देते हैं, शनि केवल उन्हीं को दण्डित या प्रताड़ित करते हैं...

#Mohini_Ekadashi 4 May 2020

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*आज के दिन मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप में देवताओं को अमृत पिलाया था * आज मोहिनी एकादशी  व्रत वैशाख मास के शुक्‍लपक्ष की एकादशी तिथि सोमवार, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में मनाया जाएगा।एकादशी तिथि 03 मई को प्रात: 9 बजकर 9 मिनट से प्रारंभ होकर 04 मई को 06 बजकर 12 मिनट पर समाप्‍त होगी मोहिनी एकादशी के पारण की बात करें तो पारण का समय अगले दिन 5 बजकर 41 मिनट से 8 बजकर 20 मिनट तक है। इस बीच कभी भी पारण किया जा सकता है. इस दिन हरि वासर समाप्त होने का समय 11 बजकर 22 मिनट पर है। मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु ने देवताओं को अमर बनाने के लिए मोहिनी रूप धारण किया था। यूं तो हर एकादशी महत्‍वपूर्ण होती है लेकिन मोहिनी एकादशी को पुराणों में विशेष स्‍थान दिया गया है। मान्‍यता है कि जो भी जातक यह व्रत करता है उसे सहस्‍त्र गोदान का फल मिलता है।  समुद्र मंथन के दौरान देव-दानवों के बीच अमृत कलश को लेकर घमासान युद्ध छिड़ गया। तब भगवान व‍िष्‍णु ने सुंदर स्‍त्री मोहिनी का रूप धारण किया। जिसपर असुर मोहित हो उठे। तब श्रीहर‍ि ने देवताओं को अमृत पान कराया। इससे सभी देवता अमर ह...

#Narsimha jayanti on 6th May 2020

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* नृसिंह जयंती 6 मई को चित्रा नक्षत्र में मनाई जाएगी * वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 6 मई बुधवार को चित्रा नक्षत्र सिद्धि योग में नृसिंह जयंती के रूप में मनाई जाएगी।  चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 5 मई रात्रि 11:20 बजे से प्रारंभ होकर 6 मई शाम 7:45 तक रहेगा। इसी दिन पूर्णिमा भी मनाई जाएगी।  भगवान श्री नृसिंह शक्ति तथा पराक्रम के प्रमुख देवता हैं, पौराणिक मान्यता एवं धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यप का वध किया था।  नृसिंह, भगवान विष्णु के क्रोधावतार हैं। भगवान विष्णु ने  हिरण्यकश्यप पर क्रोध करते हुए उसे मारने के लिए ये अवतार लिया था। चूंकि, क्रोध से भगवान नृसिंह का शरीर जलता है, इसलिए उन्हें ठंडी चीजें अर्पित की जाती हैं इसी पावन दिवस को भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप में अवतार लिया तथा दैत्यों का अंत कर धर्म कि रक्षा की नरसिंह अवतार में भगवान विष्णु ने आधा मनुष्य व आधा शेर का शरीर धारण किया । नृसिंह जयंती के दिन व्रत-उपवास एवं पुजा अर्चना अपने घर मे रहक...