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chandrma ke upay

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Magh gupt navratri 2023 kab hai

* नववर्ष की पहली माघ गुप्त नवरात्रि 22 जनवरी से शुरू होगी* पहली नवरात्रि गुप्त नवरात्रि होगी। 22 जनवरी से 30 जनवरी तक पूरे 9 दिन रहेगी। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि ये नवरात्रि माघ महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक चलती है। मां दुर्गा को उपासक 9 दिन तक गुप्त तरीके से शक्ति साधना व तंत्र  सिद्धि करते हैं। * माघ गुप्त नवरात्रि शुभ मुहूर्त* पंचांग के मुताबिक माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 22 जनवरी 2023 को सुबह 02 बजकर 22 मिनट पर आरंभ हो रही है और 22 जनवरी को ही रात 10 बजकर 27 मिनट पर इसकी समाप्ति होगी। घटस्थापना मुहूर्त 22 जनवरी को सुबह 10:04 बजे से सुबह 10:51बजे तक रहेगा। घटस्थापना अभिजित मुहूर्त - दोपहर 12:17 से दोपहर 01:00 बजे तक रहेगा। * गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा को इन चीजों का लगाएं भोग* प्रतिपदा- रोगमुक्त रहने के लिए प्रतिपदा तिथि के दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी से बनी सफेद चीजों का भोग लगाएं। द्वितीया- लंबी उम्र के लिए द्वितीया तिथि को मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भोग लगाएं। तृतीया- दुख से मुक्ति के लिए तृतीया तिथि पर मां च...

mitti ke ganpati kare sthapit

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* मिट्टी के गणपति विराजमान करना शास्त्रसम्मत* गणेश चतुर्थी पर मिट्टी के गणेश ही स्थापित करने चाहिए। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि मिट्टी की मूर्ति में पंचतत्व होते हैं इसलिए पुराणों में भी ऐसी प्रतिमा की पूजा का ही विधान बताया गया है। ग्रंथों में मिट्टी को पवित्र माना गया है। जानकारों का कहना है कि कलयुग में मिट्टी की प्रतिमा को ही ज्यादा महत्व बताया गया है। ऐसी मूर्ति में भगवान गणेश के आवाहन और पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शिवपुराण का कहना है कि देवी पार्वती ने पुत्र की इच्छा से मिट्टी का ही पुतला बनाया था, फिर शिवजी ने उसमें प्राण डाले थे। वो ही भगवान गणेश थे। शिव महापुराण में धातु की बजाय पार्थिव और मिट्‌टी की मूर्ति को ही महत्व दिया है। मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा की पूजा करने से कई यज्ञों का फल मिलता है। केमिकल से बनी या प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तिपूजा शास्त्रसम्मत नही है।  इन मूर्तियों का विसर्जन करने पर नदियों, समुद्र और नहरों में न जाने कितना ही प्रदूषण हम अनजाने में फैला देते हैं।पर्यावारण को ध्यान में रखते हुए इस बार इको फ्रेंडली गणेशा को घर ला...

shanichri amavasya 27 August 2022

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* शनिचरी अमावस शिव योग व पद्म योग में 27 को पड़ेगी* भाद्रपद महीने में पड़ने वाली शनि अमावस्या 27 अगस्त को पड़ेगी। यह इस साल की अंतिम शनि अमावस्या होगी।  ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि इस शनैश्चरी अमावस्या के दिन दो बहुत ही दुर्लभ योगों शिव योग और पद्म योग का निर्माण हो रहा है। शनि अमावस पर बोहरापुर नवग्रह मंदिर व जीवाजीगंज नवग्रह मंदिर पर भक्तों का मेला लगेगा। और ग्वालियर के पास बामौर के ऐति मंदिर पर भक्त गण दर्शन करने दूर दूर से आते है। भाद्रपद अमावस्या तिथि की शुरुआत शुक्रवार, 26 अगस्त को दोपहर 12:23 बजे से होगी और इसका समापन शनिवार, 27 अगस्त 2022 को दोपहर 01:46 बजे होगा।  अमावस्या तिथि के दिन शनिदेव की उपासना के साथ-साथ पितृ तर्पण, पिंड दान आदि करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि, सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।  मान्यता है कि यह दिन पितृ दोष, काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए भी खास होता है। शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना गया है। ऐसे में शनिश्चरी अमावस्या का दिन शनि की महादशा से पीड़ित राशियों के लिए खास माना गया है। जिन जातकों की साढ़...

Hartalika teej on 30 agust 2022

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हरतालिका तीज व्रत से पति-पत्नी के बीच बढ़ता है प्रेम हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद माह शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को 30 अगस्त 2022 को रखा जाएगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन मां गौरा और भगवान शिव जी की विधि पूर्वक पूजा की जाती है। ये व्रत सुहागिन महिलाओं के द्वारा सुख-सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। वहीं कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की कामना के साथ इस व्रत को रखती हैं। ये निर्जला व्रत होता है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं करवा चौथ की ही तरह शाम को चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। *हरतालिका तीज शुभ मुहूर्त * भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अगस्त दिन सोमवार को दोपहर 03 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 30 अगस्त मंगलवार को दोपहर 03 ...

कजरी तीज 14 अगस्त को मनाई जाएगी

* सर्वार्थसिद्धि योग में 14 को मनेगी कजरी तीज* कजरी तीज का त्योहार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त रविवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि तृतीया तिथि 13 अगस्त की मध्य रात्रि 12 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 14 अगस्त की रात 10 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। इस बार कजरी तीज का त्योहार 14 अगस्त को ही मनाया जाएगा। इसी दिन सर्वार्थसिद्धि योग भी बन रहा है जो 14 को रात्रि 09:56 से 15 को सुबह 05:49 तक रहेगा। हिंदू कैलेंडर में श्रावण मास के बाद भाद्रपद का महीना आता है। भाद्रपद को भादो भी कहते हैं। इसमें कई खास व्रत-त्योहार आते हैं। इन्हीं में से एक है कजरी तीज, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का त्योहार मनाने की परंपरा है। कजरी तीज के दिन सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं। हालांकि कुवांरी लड़कियों के लिए भी इस व्रत को बहुत फलदायी माना गया है। ऐसी मान्यताएं हैं कि शादीशुदा या कुंवारी लड़कियां अगर सच्चे मन से कजरी तीज का उपवास करें तो उन्हें सौभाग्यवती का वरदान प्राप्त होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वत...

dhanu sankranti शुभ कार्यो पर लगेगा विराम

*धनु संक्रांति से शुभकार्यो पर लगेगा विराम* सूर्य ग्रह 16 दिसंबर 2021 को प्रातः 3 बजकर 28 मिनट पर अपनी मित्र राशि धनु राशि में प्रवेश करेंगे, और 14 जनवरी 2022 दोपहर 2 बजकर 29 मिनट तक इसी राशि में रहेंगे।  ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि धनु संक्रांति से मकर संक्रांति तक के काल को खरमास कहा जाता है। इस काल में सभी शुभ कार्य वर्जित माने गए है।इस काल में भगवान विष्णु की पूजा और भगवान सूर्य की उपासना का विशेष महत्व है। *क्यों नही होते खरमास में मांगलिक कार्य* धार्मिक मान्यता के अनुसार, खरमास के दौरान सूर्य की चाल धीमी होती है इसलिए इस दौरान किया गया कोई भी कार्य शुभ फल प्रदान नहीं करता है। इस दौरान हिंदू धर्म में बताए गए संस्कार, जैसे मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, नामकरण, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार का आरंभ, वधू प्रवेश, सगाई, विवाह आदि कोई भी कार्य नहीं किया जाता है। मान्यता है कि सूर्य देव जब भी देवगुरु बृहस्पति की राशि पर भ्रमण करते हैं, तो मनुष्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता. ऐसे में उनका सूर्य कमजोर हो जाता है और उन्हें मलीन माना जाता है.  सूर्य के मलीन होने के कारण इ...