navratri puja

*ग्वालियर शहर में माता के कई सारे दशकों पुराने मंदिर है जिनकी नवरात्रि पर अष्टमी व नवमी की पूजा होती है*
ग्वालियर शहर में कई दशकों पुराने ऐसे मंदिर है जिनकी विचित्र कहानियां सुनने को मिलती है।ऐसे कई माता के मंदिर हैं, जहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। उनमे से कुछ खास देवी मंदिर ग्वालियर में स्थित है जिनकी बहुत मान्यता है। 
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि चैत्र नवरात्रि की समाप्ति पर अष्टमी तिथि 20 को व नवमी तिथि 21 को पूजा का बहुत महत्व है।
*नहरवाली माता मंदिर, चन्द्रबदनी नाका ग्वालियर*
नहरवाली माता मंदिर ग्वालियर, जो कि चन्द्रबदनी नाके पर स्थित है यह मंदिर लगभग 250 वर्ष पुराना है। इसकी मान्यता है कि इस मंदिर पर कभी शेर अपनी हाजरी कगने आते थे। यह माता भक्तो की मनोकामना पूरी करती है। और जिन महिलाओं के बच्चे नही होते वो महिलाये यहाँ मन्नत मांगती है और संतान होने के पश्चात यहाँ झूला चढ़ाती है।
*भेलसे वाली माता, जनकताल बोहरापुर*
लगभग 173 वर्ष पूर्व सिंधिया शासक जयाजीराव के सेनापति गोविन्दराव बिट्ठल ने भेलसा (विदिशा) पर आक्रमण किया और वहां से लूटे गए खजाने के साथ मां तुलजा भवानी की प्रतिमा भी आ गई। जयाजीराव महाराज ने इस प्रतिमा को पहाड़ी स्थित मंदिर में स्थापित किया। भेलसे से आने के कारण मंदिर का नाम ही भेलसे वाली पड़ गया।यहां विराजमान प्रतिमा तुलजापुर वासिनी महिषासुर मर्दिनी के रूप में हैं। माता रानी का संपूर्ण श्रृंगार महाराष्ट्रीयन पद्धति से किया जाता है।
 इस माता की बहुत मान्यता है यहाँ श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए नवरात्रि में एकत्रित होते है।
*मांढरे वाली माता मंदिर, कैंसर पहाड़ी*
135 साल पहले जयाजी राव सिंधिया ने कराई थी स्थापना।इस मंदिर में विराजमान अष्टभुजा वाली महिषासुर मर्दिनी मां महाकाली की प्रतिमा अद्भुत और दिव्य है।
शासक मांढऱे की माता सिंधिया राजपरिवार की कुल देवी है और इसी वजह से इस मंदिर का महत्व अधिक है। मंदिर का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि माता की मूर्ति के दर्शन सीधे जयविलास पैलेस से होते थे। मंदिर व जयविलास पैलेस का मुख आमने-सामने है।
*450 वर्ष पुराना है शीतला माता मंदिर*
ग्वालियर से 20 किलोमीटर दूर  सांतऊ गांव में शीतला माता का मंदिर है जहाँ नवरात्रि में मेला लगता है। यह मंदिर लगभग 450 साल पुराना है। शीतला देवी का एक ऐसा मंदिर है, जहां देवी अपने भक्तों की पूजा से प्रसन्न होकर यहां आकर विराजमान हो गई।मां शीतला की महिमा इतनी बढ़ गई है कि नवरात्रि के दिनों में दूर-दूर से उनके भक्त बिना जूते चप्पल पैदल चलकर दर्शन करने पहुंचते हैं। निसंतान दंपति को  संतान प्राप्त होती है। वहीं लोग मां के दरबार में सुखी जीवन के लिए अपने बच्चों को पालने में झूलाते हैं।
 बताया जाता है कि घने जंगल के कारण यहां बहुत शेर रहा करते थे। इसके बावजूद मां के भक्तगण रोज उनकी पूजा अर्चना करने आते रहे। एक समय पूरे चंबल इलाके में डकैतों का बोलबाला था लेकिन डकैतों ने इस इलाके में कभी लूटपाट नहीं की ना ही कभी श्रद्धालुओं की परेशान किया। लोगों का कहना है कि डकैत भी मां के दरबार में अपनी प्रार्थना लेकर आते थे।   और शीतला मंदिर पर पीतल का बहुत बड़ा घंटा हर नवरात्रि पर चढ़ाते थे।

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