वर्षा ऋतु का प्रारंभ 21 जून से


वर्षा ऋतु का प्रारंभ 21 जून से सूर्य के दक्षिणायन होते ही हो जाएगा जो 23 अगस्त तक रहेगा। उसके पश्चात शरद ऋतु का प्रारंभ होगा
 जीवन में सभी ऋतुओं का महत्व है लेकिन सबसे अधिक महत्व वर्षा ऋतु का है जिसके कारण पृथ्वी की संपूर्ण जीवन प्रणाली चलती है लेकिन कभी-कभी अत्यधिक वर्षा के कारण कुछ हानि भी हो जाती है लेकिन इसके महत्व के आगे यह नगण्य है.

वर्षा हमारी धरती के लिए बहुत आवश्यक है इसलिए इसके जल को सहेज कर रखना चाहिए और अधिक वर्षा हो इसलिए पेड़ पौधे लगाने चाहिए।
जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में आता है तो वर्षा प्रारम्भ होती है । यह नक्षत्र 22 जून को आषाढ़ मास कृष्णपक्ष की पंचमी तिथि को आएगा।
      वर्षा आने के आठ नक्षत्र माने गए है। आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्व फाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी एवं हस्त नक्षत्र।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया की जब सूर्य इन नक्षत्र से भ्रमण करता है तो बारिश के योग बनते है।
 इस बार अच्छी वर्षा के योग बने हुए  है। और आंधी तूफान के भी योग है।
 इस वर्ष पहले नक्षत्र आर्द्रा का वाहन अश्व रहेगा। जो कि अल्प वृष्टि कराएगा। हालांकि 6 जुलाई से वर्षा का दूसरा नक्षत्र पुनर्वसु शुरू होगा,  जो अच्छी वर्षा कराएगा
17 जुलाई से श्रावण मास प्रारम्भ होगा । जब सूर्य मघा नक्षत्र से भृमण करेगा तब मूसलाधार बारिश के योग बनेंगे।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा

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